तकिये पे तेरे सर का वह टिप्पा है परा है,
चादर में तेरे वह जिस्म की सोंधी सी खुसबू,
हांथो में महकता है, तेरे चेहरे का एहसास,
माथे पे तेरे होंठो की मोहर लगी है,
तू इतनी करीब है की तुझे देखूं तो तो कैसे?
थोरी सी अलग हों तो तेरे चेहरे को देखूं !!!!
-गुलजार
चादर में तेरे वह जिस्म की सोंधी सी खुसबू,
हांथो में महकता है, तेरे चेहरे का एहसास,
माथे पे तेरे होंठो की मोहर लगी है,
तू इतनी करीब है की तुझे देखूं तो तो कैसे?
थोरी सी अलग हों तो तेरे चेहरे को देखूं !!!!
-गुलजार
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