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Saturday, January 22, 2011

आप की खातिर अगर हम लूट भी लें आसमाँ
क्या मिलेगा चंद चमकीले से शीशे तोड़ के

चाँद चुभ जायेगा उंगली में तो खून आ जायेगा
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मां ने जिस चांद सी दुल्हन की दुआ दी थी मुझे
आज की रात वह फ़ुटपाथ से देखा मैंने

रात भर रोटी नज़र आया है वो चांद मुझे
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सारा दिन बैठा,मैं हाथ में लेकर खाली कासा
रात जो गुज़री,चांद की कौड़ी डाल गई उसमें

सूदखोर सूरज कल मुझसे ये भी ले जायेगा।

1 comment:

  1. गुलजार साब का कविता भी आप पढ़ते है हमें तो मालूम नहीं था

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