आप की खातिर अगर हम लूट भी लें आसमाँ
क्या मिलेगा चंद चमकीले से शीशे तोड़ के
चाँद चुभ जायेगा उंगली में तो खून आ जायेगा
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मां ने जिस चांद सी दुल्हन की दुआ दी थी मुझे
आज की रात वह फ़ुटपाथ से देखा मैंने
रात भर रोटी नज़र आया है वो चांद मुझे
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सारा दिन बैठा,मैं हाथ में लेकर खाली कासा
रात जो गुज़री,चांद की कौड़ी डाल गई उसमें
सूदखोर सूरज कल मुझसे ये भी ले जायेगा।
क्या मिलेगा चंद चमकीले से शीशे तोड़ के
चाँद चुभ जायेगा उंगली में तो खून आ जायेगा
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मां ने जिस चांद सी दुल्हन की दुआ दी थी मुझे
आज की रात वह फ़ुटपाथ से देखा मैंने
रात भर रोटी नज़र आया है वो चांद मुझे
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सारा दिन बैठा,मैं हाथ में लेकर खाली कासा
रात जो गुज़री,चांद की कौड़ी डाल गई उसमें
सूदखोर सूरज कल मुझसे ये भी ले जायेगा।

गुलजार साब का कविता भी आप पढ़ते है हमें तो मालूम नहीं था
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