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Saturday, January 22, 2011

junbaa


उर्दू किसी समुदाय की जुबान नहीं है और यदि यह किसी समुदाय के पासद ही रही तो खराब हों जाएगी .
इसका विस्तार तभी हों सकता है जब इसे पूरा हिन्दुस्तान अपनाएगा.

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