Popular Posts
-
आ रही रवि की सवारी! नव किरण का रथ सजा है, कलि-कुसुम से पथ सजा है, बादलों से अनुचरों ने स्वर्ण की पोषक धारी! आ रही रवि की सवारी! विहाग बंदी औ...
-
मै उसे फिर पा गया था! था वही तन था वही मन, था वही सुकुमार दर्शन, एक क्षण सौभाग्य का- छुटा हुआ सा आ गया था! मै उसे फिर पा गया था! वह न बोली म...
-
मधुशाला मृदु भावों के अंगूरों की आज बना लाया हाला, प्रियतम, अपने ही हाथों से आज पिलाऊँगा प्याला, पहले भोग लगा लूँ तेरा फिर प्रसाद जग पाएगा, ...
-
दो सोंधे-सोंधे जिस्म जिस वक्त एक मुट्ठी में सो रहे थे, लबों की मद्धम तवील सर्गोसियों में साँसें उलझ गयी थी, मूंदे हुए साहिलों पे जैसे कहीं ब...
-
अरे ज्ञानियों खडग धरो ब्रह्मण का है धर्म ताग , पर क्या बालक भी त्यागी हो ? जन्म साथ सिलोच्वृति के ही क्या वे अनुरागी हों? क्या विचित्र रचन...
-
पथ की पहचान पूर्व चलने के बटोही बाट की पहचान कर ले। पुस्तकों में है नहीं छापी गई इसकी कहानी हाल इसका ज्ञात होता है न औरों की जबानी अनगिनत रा...
-
श्री गुरु चरण सरोज राज, निज मन मुकर सुधारी, बर्नाऊ रघुवर बिमल जासु, जो दायकु फल चारी बूढी हीन तनु जानिके, सुमिरो, पवन कुमार, बल बु...
-
तकिये पे तेरे सर का वह टिप्पा है परा है , चादर में तेरे वह जिस्म की सोंधी सी खुसबू , हांथो में महकता है , तेरे चेहरे क...
-
चौदहवें चाँद को फिर आग लगी है देखो, फिर बहुत देर तलक आज उजाला होगा , राख हो जाएगा तो फीर कल से अमावास होगी -गुलजार
-
आप की खातिर अगर हम लूट भी लें आसमाँ क्या मिलेगा चंद चमकीले से शीशे तोड़ के चाँद चुभ जायेगा उंगली में तो खून आ जायेगा _______ मां ने जि...

No comments:
Post a Comment