दीपक पर परवाने आये
अपने पर फ़र्काते आये,
किरणो पर बल खाते आये,
बरी बरी इच्छाएं लायें,
बरी बरी आशाएं लायें,
दीपक पर परवाने आयें,
जले ज्वलित आलिंगन में कुछ,
जले अग्निमय चुम्बन में कुछ,
रहे अधजले, रहे दूर कुछ,
किन्तु न वापिस जाने पाए,
दीपक पर परवाने आये,
पहुँच गयी बिस्तुइया सत्वर,
लिए उदार की ज्वाल भयंकर,
बचे प्रणय की ज्वाला से जो,
उदर ज्वाल के बीच समाये,
दीपक पर परवाने आये.
अपने पर फ़र्काते आये,
किरणो पर बल खाते आये,
बरी बरी इच्छाएं लायें,
बरी बरी आशाएं लायें,
दीपक पर परवाने आयें,
जले ज्वलित आलिंगन में कुछ,
जले अग्निमय चुम्बन में कुछ,
रहे अधजले, रहे दूर कुछ,
किन्तु न वापिस जाने पाए,
दीपक पर परवाने आये,
पहुँच गयी बिस्तुइया सत्वर,
लिए उदार की ज्वाल भयंकर,
बचे प्रणय की ज्वाला से जो,
उदर ज्वाल के बीच समाये,
दीपक पर परवाने आये.
-हरिवंश रॉय 'बच्चन'
हरिवंस रॉय 'बच्चन' की बेहतरीन अभिव्यक्तियाँ...लाजवाब प्रस्तुति...बधाई.
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